एक बार चलो फिर से प्रेम के दिए जलाएं नफरत के अंधेरों से कब तक यूँ ही घबराएं? प्रेम के साज से एक राग फिर से गाएं एक बार चलो फिर से प्रेम के दिए जलाएं हम तुम भला और क्या? जज़्बात के जलते पुतले हैं दो - चार घड़ी के लिए बस , कुछ मेरे हैं कुछ तेरे हैं एक बार ही सही अपने दर्द से किसी का मरहम बन जाएं एक बार चलो फिर से प्रेम के दिए जलाएं अँधेरा घनघोर ही सही एक जुगनू तो बन जाएं उमड़ते शैलाब में हम एक ठहराव को छू जाएं हृदय के आत्मिय आँखों से हर किसी को अपना बना लें एक बार चलो फिर से प्रेम के दिए जलाएं
There is something in everything and everything in something.